TMC में बढ़ेगी सियासी बेचैनी? अमित शाह-सौगत रॉय की मुलाकात और नड्डा पर शत्रुघ्न सिन्हा के बयान से तेज अटकलें

नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका लग सकता है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद और ममता के वफादार सौगत रॉय और शत्रुघ्न सिन्हा की एक तस्वीर सुर्खियां बटोर रही हैं, जिनमें वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के साथ संसद की कैंटीन में दोपहर का भोजन करते नजर आ रहे हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। शत्रुघ्न सिन्हा से जब इस तस्वीर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नड्डा को अपना पुराना दोस्त करार दिया।

हालांकि सौगत रॉय ने तुरंत पलटवार करते हुए एनडीए (NDA) की बैठक से NCPI के तीन मुस्लिम सांसदों की गैरमौजूदगी को उजागर कर पूरे मामले का रुख ही मोड़ दिया। आपको बता दें कि लीक हुई तस्वीरों में सौगत रॉय संसद कैंटीन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ एक ही टेबल पर नजर आ रहे थे। उनके साथ आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भी मौजूद थे।

तस्वीरों पर सफाई देते हुए सौगत रॉय ने किसी भी तरह की राजनीतिक साजिश या दलबदल की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया। संसद के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "कैंटीन में अमित शाह से कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई। नड्डा जी से भी कोई अलग से बात नहीं हुई। अमित शाह और एक अन्य भाजपा नेता उसी मेज पर आए। हम पहले वहां बैठे थे, वे जल्द ही चले गए। हमारी आपस में कोई बात नहीं हुई। असल में भाजपा के लोग हमसे संपर्क कर रहे हैं। हम तो एनडीए में गए लोगों से वापस लौटने के लिए कह रहे हैं।"

नड्डा मेरे पुराने दोस्त
 रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व भाजपा नेता और टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और नड्डा उनके एक पुराने मित्र हैं, इसलिए वे वहां बैठे थे।

काकोली घोष दस्तीदार का तीखा बयान

श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी और बेलेघाटा से विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संसद या विधानसभा में सामाजिक मुलाकातों के दौरान ऐसी तस्वीरें खिंचना आम बात है और इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। कुणाल घोष ने कहा, "ऐसी अटकलों का कोई अंत नहीं है। इन बातों का हमारी विचारधारा या राजनीति से कोई संबंध नहीं है।" हालांकि तृणमूल कांग्रेस (NCPI) की ही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस विवाद में घी डालने का काम किया। उन्होंने संकेत दिया कि रॉय का यह लंच एक सोची-समझी डबल ट्रैक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

काकोली घोष ने कहा, "मैंने तस्वीरों को ध्यान से देखा है। शायद वे कुछ योजना बना रहे हैं। हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे सीधे बात कर रहे हैं। राजनीति में ऐसा ही होता है, यह एक डबल ट्रैक है।"

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