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पंजाब पेपर लीक विवाद: मान सरकार पर विपक्ष का हमला, CJP की चुप्पी पर सियासत गरम

चंडीगढ़ 
पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा देना पड़ा. NEET के पेपर लीक का मामला 12 मई को जब सामने आया तो मोदी सरकार से लेकर NTA तक डिनायल करता रहा, लेकिन जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले आक्रामक छात्र आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को झुकना पड़ा. इसके साथ ही पंजाब में पेपर लीक का मुद्दा गर्मा गया है, लेकिन भगवंत मान के नेतृ्त्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार पूरी तरह डिनायल मोड में नजर आ रही है।  

पंजाब के फरीदकोट में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से जुड़े 'फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा' पेपर लीक और नकल का मामला सामने आने के बाद सूबे की राजनीति गरमा गई है. पंजाब पेपर लीक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस से लेकर बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल तक ने मान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 

विपक्षी दलों ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर आक्रामक तेवर अख्तियार कर रखा है. कांग्रेस के नेता सड़क से संसद तक विरोध कर रहे हैं तो दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर 'डिनायल मोड' में है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जंतर-मंतर से सुर्खियों में आई सीजेपी पंजाब पेपर लीक के मुद्दे पर खामोश क्यों हैं और छात्रों के हक में क्यों आवाज बुलंद नहीं कर रही है? 

पंजाब में पेपर लीक के 6 मामले सामने आए
पंजाब पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल समेत बीजेपी ने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है. इस्तीफे की मांग इसलिए तेज हो गई है, क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से विपक्षी दलों को पंजाब सरकार को घेरने का एक बड़ा राजनीतिक और नैतिक आधार मिल गया है। 

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि साढ़े चार साल के मान सरकार में 6 पेपर लीक के मामले हुए हैं.धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने विपक्षी दलों को एक मौका दे दिया है कि जब केंद्र सरकार अपने मंत्री को हटा सकती है तो पंजाब सरकार क्यों नहीं? 

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने संसद परिसर में पंजाब पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि फार्मेसी भर्ती परीक्षा, कक्षा 12वीं की अंग्रेजी परीक्षा और ग्रुप-बी पेपर सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। 

नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, कृषि अधिकारी भर्ती परीक्षा और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की ओर से आयोजित फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं. कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने मान सरकार के शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। 

डिनायल मोड में भगवंत मान सरकार.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में राज्य में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है, सरकार का तर्क है कि जो मामला सामने आया, वह असल में एक हाई-टेक नकल गिरोह का था, जिसमें पेन कैमरे और ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था, पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई की और आरोपियों को दबोच लिया. इस तरह सरकार पूरी तरह से पेपर लीक से इनकार रही है। 

हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि मान सरकार अपनी विफलता छिपाने के लिए इसे सिर्फ 'नकल' का नाम दे रही है, जबकि परीक्षा की पवित्रता का भंग होना सीधे तौर पर व्यवस्था की चूक है.  केंद्र सरकार पर पेपर लीक के खिलाफ 'आम आदमी पार्टी' हमलावर रहती है, तो अपने शासित राज्य में ऐसे मामलों पर आम आदमी पार्टी का डिमेंसिव रवैया राजनीतिक विरोधाभास पैदा कर रहा है। 

पंजाब में बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है. भले ही भगवंत मान सरकार अभी इस मामले में सख्ती से इनकार के मूड में हो, लेकिन जिस तरह से छात्र संगठन और विपक्षी दल लामबंद हो रहे हैं, उसमें कॉकरोच जनता पार्टी की खामोशी पर भी सवाल उठने लगे हैं। 

पंजाब पेपर लीक पर सीजेपी की चुप्पी पर सवाल
पंजाब पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर रखा है. सड़क से संसद तक मोर्चा खोल रखा है. जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन से सुर्खियों में आई सीजेपी पंजाब मामले पर पूरी तरह से चुप्प है, जिसे लेकर सवाल उठने लगे हैं। 

दिल्ली बीजेपी सरकार में शिक्षा मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब के पेपर लीक की घटनाओं को लेकर आम आदमी पार्टी व अरविंद केजरीवाल पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने केजरीवाल पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली में विरोध करने वाले नेता पंजाब के छात्रों के भविष्य पर चुप क्यों हैं। 

सिरसा ने पंजाब पेपर लीक के मुद्दे पर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि पंजाब में पेपर लीक की घटना होगी तो वो वहां भी आवाज उठाएंगे. समय आ गया है कि ये लोग अपने वादे पर कायम रहें और पंजाब जाकर वहां के युवाओं के लिए भी लड़ाई लड़ें, लेकिन सीजेपी पंजाब मामले पर चुप्प क्यों है, क्या पंजाब के छात्र के हक में आवाज नहीं उठाना चाहिए। 

 पंजाब पेपर लीक पर वेट एंड वाच मोड में सीजेपी
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने पंजाब पेपर लीक के मुद्दे पर सिर्फ इतना ही नहीं कहा कि वो आगे की रणनीति का ऐलान जल्द करेंगे. उन्होंने कहा कि प्लीज हमें थोड़ा समय दें. पंजाब में पेपर लीक पर भी बात करेंगे, हमारी टीम अभी इसके लिए प्लानिंग कर रहे हैं. सीजेपी का यह भी कहना है कि दिल्ली का आंदोलन अभी हाल ही में खत्म हुआ है,इसलिए उन्हें और उनके संगठन को इस नए मुद्दे पर उतरने से पहले थोड़ा समय चाहिए ताकि वे पूरी तैयारी के साथ उतर सकें। 

वहीं, बीजेपी नेता चाहते हैं कि सीजेपी तुरंत पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ भी सड़क पर उतरे, लेकिन सीजेपी अभी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. पंजाब पेपर लीक का मुद्दा काफी गर्मा गया है। 

कांग्रेस से लेकर अकाली दल और बीजेपी तक आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार के चार वर्षों के कार्यकाल में छह बड़े पेपर लीक हो चुके हैं, जिससे करीब पांच लाख युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। 

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