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पंजाब में बढ़ी गर्मी, बिजली की मांग 16,000 मेगावाट पहुंची, पावर सिस्टम पर बढ़ा दबाव

पटियाला.

पंजाब में भीषण गर्मी और धान की रोपाई के चरम सीजन ने बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। सोमवार को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग नया रिकॉर्ड बनाते हुए 16,130 मेगावाट तक पहुंच गई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को केंद्रीय पूल से निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेनी पड़ रही है।

इसके बावजूद कई इलाकों में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली विभाग के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 12 बजे राज्य में बिजली की मांग 16,130 मेगावाट दर्ज की गई। यह इस सीजन की अब तक की सबसे अधिक मांग है। बढ़ते तापमान और धान की फसल के लिए लगातार सिंचाई की जरूरत के कारण बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है।

बाहरी ग्रिड से मांगी गई सप्लाई
जानकारी के अनुसार पंजाब की निर्धारित ड्रॉअल सीमा 10,350 मेगावाट है, जबकि राज्य वर्तमान में लगभग 10,605 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड से प्राप्त कर रहा है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न बिजली संयंत्रों और अन्य स्रोतों से करीब 5,361 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है। राज्य के ताप बिजलीघरों में लहरा मोहब्बत संयंत्र से लगभग 556 मेगावाट, गोइंदवाल संयंत्र से 490 मेगावाट, रोपड़ ताप बिजलीघर से 520 मेगावाट, राजपुरा ताप बिजलीघर से 1,326 मेगावाट तथा तलवंडी साबो संयंत्र से 1,581 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, जलविद्युत परियोजनाओं से लगभग 440 मेगावाट बिजली मिल रही है।

ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही बिजली
बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती मांग और कुछ उत्पादन इकाइयों के प्रभावित होने के कारण अतिरिक्त बिजली बिजली एक्सचेंज से ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है। इसका सबसे अधिक असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। धान की फसल के लिए इस समय नियमित सिंचाई जरूरी है, लेकिन कई क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण किसान परेशान हैं। कई स्थानों पर किसानों ने बिजली ग्रिडों के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है और सरकार से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

शहरों में भी बार-बार हो रही बिजली कटौती
बिजली संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। कई शहरों और कस्बों में घरेलू उपभोक्ताओं को भी बार-बार बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच लंबे बिजली कट लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। घरों में पेयजल आपूर्ति, कूलर और अन्य आवश्यक उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं।

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