रांची
झारखंड के रेल विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना जल्द ही धरातल पर उतरने वाली हैमुरी-चांडिल रूट पर ट्रेनों के लिए आने-जाने की अलग-अलग पटरियां (Double Line) बिछाने को बहुत जल्द रेलवे बोर्ड की हरी झंडी मिल सकती है. इस परियोजना के स्वीकृत होने से राज्य के रेल नेटवर्क में बहुत सुधार होगा और यातायात व्यवस्था अधिक सुगम व प्रभावी बनेगी.
800 करोड़ की लागत और 68 किमी का दायरा
दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने जानकारी दी कि मुरी से चांडिल तक लगभग 68 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड के दोहरीकरण पर 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है. वर्तमान में सिंगल लाइन होने के कारण इस रूट पर ट्रेनों के क्रॉसिंग और परिचालन में काफी समय नष्ट होता है. डबल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की आवाजाही तेज, सुरक्षित और अधिक व्यवस्थित हो जाएगी.
बाइपास और ओवर रेल लाइन से मिलेगी मजबूती
परियोजना के तहत सिल्ली बाइपास लाइन का निर्माण भी किया जाना है, जो रूट की क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा. इसके साथ ही गुंडा विहार से चांडिल तक
प्रस्तावित रेल ओवर रेल लाइन के निर्माण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है. इन तकनीकी सुधारों से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और मालगाड़ियों व यात्री ट्रेनों के दबाव को संतुलित करना आसान होगा.
सांसद प्रदीप वर्मा का प्रयास और फंड आवंटन
इस परियोजना को गति देने के लिए सांसद प्रदीप वर्मा ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर विशेष फंड आवंटन की मांग की थी. उम्मीद जताई जा रही है कि इसी माह के भीतर फंड आवंटन और प्रशासनिक स्वीकृति के सकारात्मक परिणाम सामने आ जाएंगे. अरुण जोशी ने कहा कि यह परियोजना झारखंड के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी.

