ईश भक्ति है सबसे सबल सहारा
भक्ति को राजमार्ग कहा गया है। ज्ञान और कर्म का मार्ग भी उसी मंजिल तक पहुंचाता है, परंतु वह कष्टसाध्य है। गीताकार ने ज्ञान द्वारा निराकार अव्यक्त परमेश्वर को प्राप्त करना दुष्कर बताया है। भक्ति द्वारा चित्त और बुद्धि को भगवान में स्थिर करना सरल और सुगम है। अभ्यास और विधि-विाधन के पालन से एकाग्रता…
