UPI पेमेंट्स में 1 घंटे की देरी: RBI की नई पहल, इन नियमों में होने जा रहा बदलाव

 नई दिल्ली 
भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डिजिटल पेमेंट्स की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. इंस्टैंट पेमेंट्स की वजह से UPI को मनी ट्रांसफर और किराने की दुकान तक पर यूज किया जा रहा है. अब इसी खूबी को कुछ समय के लिए बदला जा सकता है। 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसको लेकर चर्चा पत्र जारी किया है, जिसमें डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए ट्रांजैक्शन पर कुछ घंटे की देरी का नियम लाने का प्रस्ताव दिया है. पेमेंट्स में करीब 1 घंटे तक की देरी होगी। 

RBI का यह प्रपोजल कुछ पेमेंट्स के प्रोसेस के तरीकों को बदलने के लिए है. अगर ये नियम लागू होता है तो 10 हजार रुपये से अधिक रुपये वाली पेमेंट्स तुरंत कंप्लीट नहीं होगी. इस पेमेंट्स को कंप्लीट होने में कुछ समय लगेगा। 

रुपये भेजने वाले के बैंक खाते से रकम तुरंत कट जाएंगी लेकिन जिसके बैंक खाते में रुपये पहुंचने हैं, उसको 1 घंटे के बाद रिसीव होंगे. यह बदलाव सुरक्षा के मद्देनजर लाया जा रहा है. इस दौरान सेंडर्स चाहें तो पेमेंट्स को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकते हैं। 

इस कड़े कदम के पीछे की सबसे बड़ी वजह ऑनलाइन धोखाधड़ी से होने वाला भारी नुकसान है। साल 2025 में ही भारत में डिजिटल फ्रॉड के कारण लोगों ने 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा दिए हैं। आंकड़े बताते हैं कि भले ही 10,000 रुपये से बड़े ट्रांजेक्शन संख्या में कम हों, लेकिन फ्रॉड की कुल वैल्यू का करीब 98.5% हिस्सा इसी कैटेगरी से आता है। अक्सर ठग 'सोशल इंजीनियरिंग' यानी लोगों को डराकर या लालच देकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। 1 घंटे की इस देरी (Holding Period) का मकसद पीड़ित व्यक्ति को सोचने और समझने का समय देना है। अगर किसी को पता चलता है कि उसके साथ धोखा हुआ है, तो वह उस एक घंटे के भीतर अपना ट्रांजेक्शन कैंसिल कर सकेगा और अपनी मेहनत की कमाई को डूबने से बचा पाएगा।

सिर्फ 1 घंटे का ब्रेक ही नहीं, RBI सुरक्षा के लिए कुछ और भी बड़े बदलाव करने जा रहा है। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए नियम बनाया जा रहा है कि 70 साल से अधिक उम्र के लोग अगर 50,000 रुपये से ज्यादा ट्रांसफर करते हैं, तो उनके किसी भरोसेमंद व्यक्ति (Trusted Person) की अनुमति जरूरी होगी। साथ ही, बैंकों को निर्देश दिया जा सकता है कि अगर किसी व्यक्तिगत या छोटे बिजनेस खाते में अचानक 25 लाख रुपये से ज्यादा जमा होते हैं, तो बैंक पूरी पुष्टि के बाद ही उसे क्रेडिट करे। इसके अलावा, एक 'किल स्विच' (Kill Switch) का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे कोई भी ग्राहक फ्रॉड का शक होने पर एक ही बटन दबाकर अपनी UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड जैसी सभी डिजिटल सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा। हालांकि इससे कुछ लोगों को तात्कालिक असुविधा हो सकती है, लेकिन आपकी जमापूंजी को सुरक्षित रखने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

1 घंटे देरी का नियम P2P ट्रांसफर पर लागू होगा 
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नियम सिर्फ पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर लागू होगा. दुकान पर QR कोड के जरिए होने वाले पेमेंट्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। 

साइबर ठगी पर नकेल कसने की तैयारी  
RBI इस लिए ये बदलाव लाना चाहता है ताकि का साइबर ठगी पर नकेल कसी जा सके. साइबर ठगी के केस में रुपये कुछ मिनट के अंदर ना जाने कितने सारे अकाउंट से होकर गुजर जाते हैं और कैश के रूप में निकाल लिए जाते हैं. इसके बाद रिकवरी में परेशानी आती है। 

1 घंटे की देरी का फॉर्मुला कैसे आएगा काम?   
RBI की सलाह है कि 1 घंटे की देरी मददगार साबित होगी. रिजर्व बैंक इस देरी को गोल्डन आवर के रूप में मानता है, जहां यूजर्स को खुद सोचने का समय मिलेगा और इससे ठगी से बाहर निकलने का मौका मिलेगा. खाता धारक चाहे तो ट्रांजैक्शन को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकेंगे। 

यहां गौर करने वाली बात यह है कि डेली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऑटो डेबिट और सब्सक्रिप्शन वाली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं दिखाई देगा. अगर शख्स किसी अनजान व्यक्ति को रुपये ट्रांसफर करते हैं, तो उसको ज्यादा सेफ्टी मिलेगी। 

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