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मेरठ में ₹200 करोड़ के निवेश से स्थापित होगी क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ रिफाइनरी

लखनऊ

योगी सरकार में ठोस कानून व्यवस्था और उद्योग समर्थित नीतियों का असर प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में मेरठ की डीप टेक स्टार्टअप सर्कुलॉजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड ने प्रदेश में करीब 200 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। कंपनी ने इन्वेस्ट यूपी के साथ मेरठ में लिथियम-आयन बैटरी और रेयर अर्थ रिफाइनरी स्थापित करने के लिए एमओयू साइन किया है। इस परियोजना से करीब 300 लोगों को प्रत्यक्ष और 1,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। 

पुरानी बैटरियों से निकाले जाएंगे उपयोगी खनिज

यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि योगी सरकार स्थानीय उद्यमियों, स्टार्टअप और तकनीक आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में यूपी स्टार्टअप मिशन के माध्यम से प्रदेश में नए विचारों को व्यावसायिक परियोजनाओं में बदलने और स्टार्टअप को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। मेरठ में प्रस्तावित परियोजना भी प्रदेश के स्थानीय स्टार्टअप को बड़े औद्योगिक निवेश से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई तकनीक पर आधारित उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है। सर्कुलॉजी की रिफाइनरी चरणबद्ध तरीके से विकसित की जाएगी। पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद इसमें हर साल 10,000 टन सामग्री के प्रसंस्करण की योजना है।

रिफाइनरी में इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों को पुनः प्राप्त किया जाएगा। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, हार्ड ड्राइव और इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों में इस्तेमाल होने वाले पुराने स्थायी चुंबकों से नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे रेयर अर्थ तत्वों को भी निकाला जाएगा। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र में होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी से लेकर आधुनिक तकनीकी उपकरणों और ऊर्जा उत्पादन से जुड़े संयंत्रों तक, इनकी अहम भूमिका है। ऐसे में पुरानी बैटरियों और उपकरणों से इन खनिजों को दोबारा प्राप्त करना संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ घरेलू आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में भी मददगार हो सकता है।

आयात पर निर्भरता कम करने में मिलेगी मदद

सीईओ ने बताया कि लिथियम, कोबाल्ट और निकेल की घरेलू जरूरतों का लगभग पूरा हिस्सा आयात से पूरा होता है। इसी तरह, रेयर अर्थ चुंबकों की आपूर्ति में भी आयात पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में देश के भीतर रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग की क्षमता विकसित करना जरूरी हो गया है। भारत सरकार ने भी महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत ई-कचरे और इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों से महत्वपूर्ण खनिजों की रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना भी शामिल है। इसके अलावा, नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में रेयर अर्थ स्थायी चुंबकों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना का लक्ष्य सालाना 6,000 टन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। सर्कुलॉजी की प्रस्तावित रिफाइनरी से प्राप्त रिसाइकिल्ड खनिज और रेयर अर्थ ऑक्साइड इस तरह की घरेलू औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

यूपी स्टार्टअप मिशन से मिला सहयोग

मेरठ स्थित सर्कुलाॅजी डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त डीप टेक स्टार्टअप है, जो सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों की रिसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल पर काम करती है। कंपनी को उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के तहत यूपी स्टार्टअप मिशन से सहयोग मिला है। एमओयू के तहत योगी सरकार आवश्यक स्वीकृतियां और मंजूरियां प्राप्त करने में सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही, परियोजना को लागू नियमों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा। करीब 200 करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना प्रदेश में उभरते तकनीकी उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने की संभावना रखती है। इससे मेरठ की पहचान पारंपरिक औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग जैसे नए क्षेत्रों में भी विकसित हो सकती है।

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