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महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर, झारखंड में डेयरी से बढ़ेंगे कमाई के अवसर

रांची
 गव्य विकास निदेशालय द्वारा डेयरी के माध्यम से महिला सशक्तीकरण विषय पर आयोजित कार्यशाला में कृषि सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही झारखंड में 'महिला किसान खुशहाली योजना' लागू की जाएगी, जिसके तहत महिलाओं को इंटीग्रेटेड फार्मिंग (एकीकृत कृषि) से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जाएगी।

कृषि सचिव ने जोर देकर कहा कि डेयरी का दायरा केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि गाय पालन से जुड़े अन्य उत्पाद और दुग्ध प्रसंस्करण भी इसका मुख्य हिस्सा हैं। किसानों व महिलाओं को डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

डेयरी उत्पादों से तीन गुना अधिक मुनाफा
नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI), करनाल के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि पूर्वी भारत और विशेषकर झारखंड में डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।

हरियाणा और पंजाब की तर्ज पर झारखंड की महिलाओं को भी को-ऑपरेटिव (सहकारिता) बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि NDRI झारखंड की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार है और जल्द ही महिलाओं के एक दल को प्रशिक्षण के लिए हरियाणा ले जाया जाएगा।

3 लाख लीटर से अधिक दूध संग्रह कर रहा झारखंड मिल्क फेडरेशन
नेशनल मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने बताया कि झारखंड में पशुओं के नस्ल सुधार कार्य से बड़ा बदलाव आया है। वर्तमान में झारखंड मिल्क फेडरेशन प्रतिदिन 3 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह कर रहा है।

वहीं, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के कुलपति डॉ. एस. सी. दुबे ने कहा कि झारखंड का समग्र विकास महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है।

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील
कार्यक्रम की शुरुआत में गव्य निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया और विभाग द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए महिलाओं से इनका लाभ उठाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो, मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार और गव्य विभाग के उप निदेशक डॉ. मनोज तिवारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी व महिला पशुपालक उपस्थित थे।

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